एशिया से बाहर टीम इंडिया क्यों हारती है, ये हैं कारण

टेस्ट मैच में भारत की हार के कारणोंं की जांच पड़ताल में पता चला है कि टीम इंडिया एशिया से बाहर क्यों हार जाती है। हालांकि पिछले ढाई साल में भारत नौवीं टेस्ट सीरीज जीतीं हैं। इनमें से अधिकांश सीरीज एशिया में खेलीं गर्इं हैं लेकिन एशिया से बाहर दक्षिण अफ्रीका में खेली गई सीरीज को नहीं जीत पाई। इससे पहले आस्ट्रेलिया,इंग्लैंड,न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ खेली गई सात सीरीजों में सभी में टीम इंडिया की हार हुई थी। भारत की विदेशों में हार का कारण विदेशी धरती पर बैटिंग और बॉलिंग का एवरेज के आंकड़े दशार्ते हैं कि भारत का प्रदर्शन एशिया में कैसा रहता है और एशिया के बाहर कैसा रहता है। एशिया के बाहर पुअर परफार्मेंस के कारण भारत को हार का सामना करना पड़ता है। आजिंक्य रहाणे, मुरली विजय, शिखर धवन, रोहित शर्मा और पुजारा के जनवरी 2011 से अगस्त 2015 के बीच हुए मैचों की बल्लेबाजी के एवरेज में सिर्फ रहाणे का प्रदर्शन विदेशी धरती पर अवश्य ही सराहनीय रहा जबकि कोहली समेत बाकी सभी खिलाड़ियों का प्रदर्शन काफी खराब रहा। रहाणें ने एशिया में 43.64 और विदेशी धरती पर 48.59 के औसत से बैटिंग की । इसमें रहाणे ने विदेशी धरती पर 4.95 एवरेज से अच्छी बैटिंग की। इसके अलावा मुरली विजय ने एशिया में तो 41.27 एवरेज से बैटिंग की जबकि विदेशी धरती पर उनकी धार कुंद पड़ गई और 38.30 के औसत से बैटिंग की। शिखर धवन का तो और भी बुरा हाल है। वह एशिया में 42.80 एवरेज से दहाड़ते हैं तो विदेश धरती पर वह 27.81 के एवरेज पर उतर आते हैं। विराट कोहली का भी यही हाल है एशिया में 65.02 की एवरेज से बल्ला चलाते हैं तो विदेशी धरती पर 48.72 की एवरेज पर ही रह जाते हैं। रोहित शर्मा एशिया में 51.42 औसत से बल्लेबाजी करते हेै तो विदेशी धरती पर 23.78 एवरेज पर लुढ़क जाते हैं। पुजारा का भी यही हाल है।वह एशिया में 59.56 और विदेशों में 28.06 एवरेज से प्रदर्शन करते हैं। रही बॉलिंग की बात तो भारतीय बॉलरों का भी यही हाल है। एशिया में धांसू प्रदर्शन करने वाले बॉलर विदेशी धरती में बोल जाते हैं। 

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